Monday, May 15, 2017

कविता और फन

कल रात काफी समय करवट बदलने के बाद
मैंने सोचा अपने विचारों को शब्दों में उतार दूँ
कुछ २-४ ख्याल ही थे,
सोचा कुछ मिनटों में काम ख़तम हो जाएगा
तो कंप्यूटर खोल लिखना चालू किया

की शर्मा, कविता काफी इल्यूसिव किसम की चीज़ है
बड़े बड़े कवियों ने इसकी व्याख्या करने की कोशिश तो की
पर कुछ ख़ास सफल नहीं हो पाए
तुम फिर किस खेत की मूली हो
माना की २-४ वर्कशॉप ले लीं तुमने
तकरीबन २०० लोगों की कविताओं को
बड़े रॉब से घटिया करार दे दिया

पर हो तो तुम भी एक नौकरीशुदा इंसान
जो रात के अँधेरे में लैपटॉप चला कर
सोशल मीडिया में बेतुकी पंक्तियाँ लिखता है
जिसकी प्रोफाइल की पहुंच कुल १५ लोगों तक है
और जो आज भी उस समय में अटका हुआ है
जब कविता लिख पाना एक फन माना जाता था

शर्मा, आगे बढ़ो!
हर लिखने वाला खुद को कवी बता रहा है
और फिर तुम तो काफी समय से लिख रहे हो
एक आध कविताएं कविता कहलाने लायक तो लिख ही दी होंगी
क्या पता तुम्हारा रुतबा ८ लाइक्स के आगे बढ़ जाए

मैं स्टेज की तरफ बढ़ रहा हूँ
नेपथ्य से आवाज़ आ रही है
की शर्मा जीत के आओगे लोगों का दिल

मुझसे पहले कई लोग आ चुके हैं
कुछ फेमस लोग, कुछ नए चेहरे,
कोई तारों की बाते कर रहा है
कोई समाजवादी नारे लगा रहा है
कोई तुकबंदी कर रहा है
तो कोई टोपिकल चीज़ों पर आर्ग्यूमेंट्स दे रहा है

मेरे पास कहने को १४ पंक्तियाँ हैं
शायद थोड़ी एब्स्ट्रैक्ट, थोड़ी डेन्स
एक बार किसी से कहा था
की कविताएं ऐसी नहीं होतीं
अच्छी बात है!

मेरी कविता का नाट्यांतरण नहीं हो सकता
ऐसा मुझे लगता है, सुनने वालों को नहीं
अच्छी बात है!

मेरे चेहरे पर एक नर्वस सी मुस्कुराहट है
अभी पिछले दिन किसी ने इसे आडम्बर कह दिया
मेरी कविता में मर्म नहीं है
और कहने का तरीके की तो बात न ही करें तो बेहतर
शर्मा क्या ख़ाक जीतेगा लोगों का दिल

कुछ इक्का दुक्का तालियों के बाद,
और १४ पंक्तियों के बाद
मुझे एहसास होता है
कि शर्मा दिल जीतने नहीं आया है
शर्मा लिखने क्या प्रयास करता है
शर्मा के पास फन है,
शर्मा फनकार नहीं!

विनम्रता से कुछ समीक्षा सुनने के बाद
मैं धन्यवाद दे कर वापस अपनी औकात पर आ जाता हूँ
शर्मा शब्दों का सम्मान करता है
और इंसानों का भी!

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